A Simple Key For ke saath hi kriya hoti hai. Unveiled
This occasion encourages us to make profound connections with our interior selves, which promotes spiritual progress and peace. This holy year reminds us that the core of devotion is definitely the purity of our hearts as well as the sincerity of our prayers.* बेरोजगारी, करियर या शिक्षा में असफलता को दूर करती हैं।
पूजा के लिए एक स्वच्छ और शांत स्थान चुनें। वहां गंगाजल का छिड़काव करके स्थान को पवित्र करें।
तांत्रिक अनुष्ठान: इस समय में विशेष तांत्रिक अनुष्ठानों का महत्व होता है। यह अनुष्ठान केवल योग्य गुरु के मार्गदर्शन में करें।
अष्टमी या नवमी को दुर्गा पूजा के बाद नौ कन्याओं का पूजन करें और उन्हें तरह-तरह के व्यंजनों (पूड़ी, चना, हलवा) का भोग लगाएं।
विश्वविद्यालय फर्जी मार्कशीट बांट रहा था.
मातंगी : श्री ह्रीं क्लीं हूं मातंग्यै फट् स्वाहा:।
* काली के पूजक पर काले जादू, टोने-टोटकों का प्रभाव नहीं पड़ता।
दुर्गा सप्तशती, देवी स्तोत्र या महालक्ष्मी मंत्र का पाठ करें।
कलश स्थापना कब होगी, भगवती की विदाई किस दिन है? जानते हैं एक्सपर्ट से.
साधक को मनोवांछित सिद्धियां और फल प्राप्त होते हैं।
कलश के ऊपर नारियल रखें। नारियल को लाल वस्त्र में लपेटकर कलावा से बांधें।
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छिन्नमस्ता : श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं वज्रवैरोचनीयै हूं हूं फट् स्वाहा:।